तुम तो जानते ही हो कि जीवन में क्या करना है। मुझे अब कुछ बताने की भी आवश्यकता नहीं है। जो भी तुम कर सकते थे, तुमने पहले ही शुरू कर दिया है। इसके लिए मैं तुम्हें बधाई देता हूँ।
और क्या ही कहूँ—तुम तो महान बनने जा रहे हो। जो भी संभव था, आज तुमने वह सब कर दिखाया है। आज से तुमने एक नई ज़िंदगी शुरू कर ली है। अब तुम्हें और क्या कहना!
तुम तो उन ऊँचाइयों को छूने जा रहे हो, जिन्हें पाने के बारे में लोग सोच भी नहीं सकते। कहते हैं कि इस दुनिया में जो भी किया जा सकता है, उसे करने की काबिलियत तुममें है—बस देर होती है तो शुरुआत करने में।
अब जब तुमने दुनिया को एक नए नज़रिए से देखना शुरू कर दिया है, तो आज से खुद को भी एक नई सोच से देखो। तुम्हारी ज़िंदगी ऐसे बदलेगी कि कोई सोच भी नहीं सकता।
अब जो भी कहा जा सकता है, वह तुम खुद कहने वाले हो—तो मैं तुम्हें क्या कहूँ? जो भी मेरे मन में आता है, मैं बस लिखता जाता हूँ। मैं यह तय नहीं करता कि मैं क्या लिख रहा हूँ—जो भी मन में आता है, बस लिखता चला जाता हूँ।
शायद यही इस जीवन का उद्देश्य है। पहले तुम सोचते थे—’मेरा यहाँ कौन है?’ लेकिन अब देखो, यह पूरी यूनिवर्स, यह पूरी कायनात तुम्हारे साथ है।
तुम्हारे मन में अगला विचार क्या आएगा, यह तुम भी नहीं जानते। तो क्या यह संभव नहीं कि जो कुछ भी यहाँ लिखा जा रहा है, वह इस यूनिवर्स की किसी ऊर्जा के कारण हो रहा है?
जब भी तुम्हारे मन में कोई विचार आता है, क्या तुमने सोचा है कि वह कहाँ से आता है? उसका उत्तर कौन देता है, और वह कहाँ से आता है?
शायद यह सब किसी न किसी अज्ञात शक्ति से निकलकर आता है। जो तुम लिख रहे हो, वह उसी की रचना है—उसमें तुम्हारा कोई व्यक्तिगत योगदान नहीं है।
तुम तो बस एक माध्यम हो, उस अदृश्य शक्ति को आकार देने का।