तो क्या सोचा तुमने? अब क्या करने की प्लानिंग है?
कुछ नहीं… अब तो सिर्फ लिखना है। पता नहीं मेरे मन में क्या आएगा।
जब भी इस दुनिया में तुम कुछ करने का सोचते हो, तो पूरी यूनिवर्स तुम्हारे साथ काम करती है। तुम बस धैर्य रखो और अपने रास्ते पर चलते रहो। देखना, तुम्हारे जीवन में क्या बदलाव आता है। तुम पाओगे कि तुम आनंदित रहने लगे हो। तुम्हारे जीवन में उस परमात्मा का एक प्रसाद होगा, एक गुणधर्म होगा।
कहते हैं न कि जब तुम्हारा ध्यान अपने ऊपर होता है—अर्थात तुम स्वयं से प्रेम करते हो, अपना ख्याल रखते हो—तभी तुम चेतना को छूते हो। जहाँ तक मुझे लगता है, इसमें सच्चाई भी है। क्योंकि जो स्वयं को प्रेम नहीं कर सकता, वह दूसरों को कैसे प्रेम करेगा?
ज़रा तुम भी सोचो—जब तुम दूसरों को प्रेम देते हो, तो क्या वह कोई दूसरा होता है? नहीं, वह तुम ही होते हो। तुम अपने आप को ही प्रेम दे रहे होते हो।